सबसे बड़ा दानवीर कौन?

सबसे बड़ा दानवीर कौन?



एक राज्य में बारिश ना आने की वजह से अकाल पे अकाल पड रहे थे उस राज्य का राजा हमेंशा चिंता में रहने लगा 


राजा करता तो क्या करता बारिश तो भगवान की हाथ की बात है राजा ने बड़े बड़े ज्योतिषी बुलाये और इसका उपाय पूछा ज्योतिषों ने कहा 


इस राज्य में श्रीमदभागवत की कथा करेंगे तो भगवान खुश होंगे और बारिश होगी 

पर कथा में सबका हिस्सा होना चाहिये हिन्दू मुस्लिम सीख ईसाई सब जनजातिया जितनी इस गांव में रहती हो 


वो अपनी पहोच की हिसाब से दान करे मतलब औकात के हिसाब से तो कथा का परिणाम शुभ होगा और अवश्य बारिश होगी


राजा ने पूरे गाँव मे ढिंढोरा पिटवाया की जिनको भी जितना भी मन करे उतना दान दे कोई जबरदस्ती नही है एक कौड़ी भी देंगे तो चलेगा लेकिन देना जरूर


राजा के इस फरमान से राजा के सिपाई घर घर जाके दान की धनराशि लेने जाते और सबका सही से हिसाब भी रखते प्रजा ने भी दिल खोल के दान किया 


प्रजा राज्य का और राजा का बड़ा सम्मान करती थी


कथा संपन्न हुई और घनगोर बारिश हुई राजा और प्रजा की ख़ुशी का कोई ठिकाना न रहा बारिश समाप्त हुई और राजा ने अपने दरबार मे मंत्रियो के साथ बैठक करी 


और राजा ने सोचा इस धार्मिक कार्यक्रम में किसने दिल खोल के सबसे ज्यादा धन दिया है उसका में सम्मान करना चाहूंगा पर दुविधा ये है कि कैसे पता किया जाये कि किसने ज्यादा दान दिया है ?


एक मंत्री उठकर बोला महाराज इसका हिसाब है हमारे पास किसने कितना दान दिया सबसे ज्यादा दान राज्य के नगर सेठ ने दिया है वो है दस हजार सोने के सिक्के थे


राजा बोला किसने ज्यादा दान दिया इसका फैसला में करूँगा? सबसे कम धन किसने दान दिया है ?


मंत्री बोला महाराज अपने राज्य के एक कोने में एक जोपडी है उस जोपडी मे एक बुढ़िया रहती है उसका इस दुनिया मे कोई नही है वो लकड़ी बेचकर अपना पेट पालती है उसने सबसे कम धनराशि दी है उसने सिर्फ 2 कोड़ी ही दिया 


राजा बोला उस बुढिया को बुलाया जाय बुलावे पे बुढिया राजदरबार में आई 


राजा ने बुढिया से पूछा माजी अपने सिर्फ 2कोड़ी ही क्यों दान में दी ?


बुढिया बोली महाराज मेरे पास सिर्फ 4कौड़ी ही थी मेने सोचा 2कौड़ी का अपने लिए आटा लुंगी और  रोटियां बनाउंगी ओर 2 कौड़ी धर्मिककार्य में दान देदु  इसलिए मेंने 2 कौड़ी दी 


राजा ने उस बुढिया सबसे बड़ा दान देने के लिये सम्मान किया और बुढिया को ईनाम के रूपमें रहने को सोनमोहर से भरा सन्दूक दिया और एक महेल और सेवा के लिये दो दासिया  दि और विदा किया 


पूरा दरबार असमंजस में पड़ गया  मंत्री ने पूछा महाराज ये बुढिया किस तरह सबसे बड़ी दानी हुई इसने तो सिर्फ 2कौड़ी ही दान दी थी?


राजा बोला नगरसेठ ने कितना दान दिया था?


मंत्री बोला दस हजार सोनमोहर 


राजा ने मंत्री से पूछा उस नगरसेठ के पास अब कितने सोने के सिक्के होंगे ?


मंत्री बोला लाखो सिक्के होंगे अभीभी उसके पास और धनसम्पत्ति की कोई सीमा नही है उस नगरसेठ के पास पूरे राज्य में उससे अमीर कोई नही है 


राजा बोला मेने ये फैसला इस आधार पर किया है की किसने अपनी संपत्ति में कितना फीसदी दान किया उस से न्याय किया है  


मतलब नगरसेठ ने जो दान दिया वो उसकी कुल संपत्ति का कितना फीसदी होगा उसके पास तो जमीन जायदाद दुकान मकान हीरे जवाहरात मोती माणेक है  उसके पास अखुट खजाना है ये दान उसकी धन संपत्ति के मुकाबले एक फीसदी क्या रती भर भी नही


पर इस बुढिया ने अपनी सिर्फ चार कौड़ी मेसे दो कौड़ी राज्य को दान देदी मतलब इस बुढिया ने पचास फीसदी दान दिया है 


इसलिए ये बुढिया श्रीमद भागवत कथा की सबसे बड़ी दानी है मुझसे भी बड़ी दानी है..


शिक्षा;-दोस्तो ये कहानी ये शिख देती है की सिर्फ ज्यादा पैसा दान देता है उसका कुछ महत्व नही पर अपनी कुल संपत्ति का कितना फीसदी देता है ये महत्वपूर्ण हैं.


दोस्तो फिर मिलेंगे एक और नई दिलचस्प कहानी के साथ कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद🙏