एक अहंकारी राजा को साधू महात्मा का उपदेश
एक राजा था जो बडा ही अहंकारी था सेकड़ो युद्ध जीत चुका था वो हिरन के शिकार करने का बड़ा सौकीन था एक दिन उसने सोचा चलो अकेले ही शिकार करने चलते है
एक सुबह उसने अपने साथ किसी भी सैनिक को जंगल मे चलने से मना किया और अकेले ही घोड़ा लेके जंगल मे शिकार के लिए निकल पड़ा
जंगल मे दूर तक चलते चलते उसे एक हिरन दिखा उसने घोडा उस हिरन के पीछे दौड़ाया पर हिरन अपनी जान बचाने लिए बहुत तेज दौड़ने लगा
राजा भी निशाना लगाके हिरन के पीछे पीछे बहुत तेज घोड़ा दौड़ाने लगा पर हिरन बड़ी बड़ी छलांगे लगाता और राजा का तीर का निशाना चूक जाता हिरन बच जाता
ऐसा कई बार हुआ राजा ने ठान ही लिया था इस हिरन का में शिकार करके ही रहूँगा पर हिरन पे तो अपनी जान पे बन आयी थी वो भागता रहा भागते भागते घनघोर जंगल में पहोचा
राजा भी उसके पीछे पीछे पहोचा पर उसे हिरन नही दिखा वो हर जगह तलाश करने लगा पर हिरन का कही नामो निशान नही था राजा को दोपहर हुई राजा ने खाना तो क्या सुबह से पानी भी नही पिया था
और उपरसे गर्मी के दिन थे धूप तेज थी राजा को बहुत प्यास लगी थी राजा को जंगल मे नदी तो दिखी थी पर तब राजा शिकार के पीछे था
राजा नदी के तरफ जाने लगा पर वो उल्टी दिशा में जा रहा था कई घंटे घोड़ा दौड़ाने के बाद भी नदी न आई अब राजा को अहेसास हुआ कि वो शायद जंगल मे रास्ता भटक गया है
घोड़ा भी काफी थक चुका था पर अब करे तो क्या करे कुछ सूज नही रहा था उसने सोचा अकेले आकर बड़ी गलती कर दी जंगल भी काफी बड़ा था
शाम होने को आयी राजा का प्यास से गला सुख गया था घोड़ा सारा दिन दौड़ने की वजह से हाँफ रहा था राजा ने एक दिशा पकड़ी और एक ही दिशा में घोड़ा दौड़ाने लगा
घोड़ा बिना पानी पिये कितना दौड़ेगा बिचारा घोड़ा अचानक धीमा हो गया और धीरे धीरे रुक गया और अचानक से जमीन पे गिर के बेहोश हो गया
राजा को लगा घोड़ा मर गया राजा और भी हताश हो गया और राजा धीरे धीरे पैदल चलने लगा अब राजा का आखिरी सहारा था घोड़ा वो भी नही रहा राजा अंदर से टूट चुका था शाम होने को आयी थी
राजा भूख प्यास से अंधा हो चुका था अंदर से बहुत निराश हो चुका था अब उससे एक कदम भी चलने की हिम्मत नही थी राजा का हौसला जवाब दे चुका था
मौत स्पष्ट दिख रही थी अभी थोड़ीदेर में रात हो जाएगी और शेर चीते का निवाला बनाने से कोई नही रोक सकता अब ना तो तीर चलाने की ताकत बची है और ना पेड़ पे रात गुजार ने की
अचानक राजा को घनगोर जंगल के बीचोबीच एक कुटिया दिखी राजा की आँखों मे चमक आयी और राजा धीरे से चलते कुटिया में गुस गया उसने तो देखा अंदर एक साधु महात्मा समाधी में लीन थे
और एक पानी से भरा पीतल का लोटा तपस्या में लीन साधू महात्मा के चरणों के पास रखा हुआ था
राजा ने सोचा पहले महात्मा से ये पानी भरा लोटा पीने की इजाजत लेले ऐ से ही पानी पीना चोरी होगी
राजा साधु के चरणों में गिर कर बोला है महात्मा में इस राज्य का राजा हूं मुझपर दया करे कृप्या ये पानी मुजे पीने दे
महात्मा ने आँखे खोली और गुस्से से राजा के सामने देखा और बोले में ये पानी तुम्हे ना दु तो क्या करोगे तुम जाओ यहाँ से
राजा बोला महात्मा आप मुझपर दया करे मेने सुबह से एक बूंद पानी नही पिया
साधू बोला है राजन इसमें मेरी क्या गलती है?
राजा बोला महात्मा आप मुझपर दया करे आप जो मांगेगे वो में दूंगा सोना रूपा हिरे मोती कुछ भी दूंगा इस पानी के लोटे के बदले
साधु बोला राजन मुझे तुम वचन दो में जो मांगू वो तुम दोगे ?
राजा बोला वचन दिया मांगों महात्मा आप जो मांगोगे वो में दूंगा
साधू तो तुम अपना पूरा राज्य मुजे देदो मंजूर तुमने वचन दिया है अब पलट नही सकते
राजा ने सोचा जान है तो जहान है और बोला दे दिया राज्य अबसे महात्मा मेरे राज्य के राजा आप हुये अब मुजे पानी का लोटा पीने को दो और ये कहेकर राजा ने वो पानी का लोटा एक ही सांस में पी लिया
साधू ने राजा से क्रोध में कहा निकल जाओ इस राज्य से भिखारी किहीके ये राज्य मेरा है में इस राज्य का राजा हूं और तेरा जीवन दाता हूं राजा चुप चाप वहाँ से जाने लगा
ये देखकर साधु महात्मा जोर जोर से हँसने लगे,महात्मा को हँसते राजा भी आश्चर्य से देख रहा था राजा बोला महात्मा किस वजह से आपको हँसी आयी मुजे इतना लाचार और निसहाय देखकर
साधू बोला है राजन तूने एक छोटे से पानी के लोटे के लिए अपना राजपाट मुझे दे दिया इस बात से मुजे हँसी आयी तुम जैसे शूरवीर राजा को ये शोभा नहीं देता ?
राजा बोला क्या करू महात्मा में प्यास बुझाने के लिये बेबस था?
साधू बोला राजन तुमने सेकड़ो राज्य जीते है पर कभी प्यास को जीता है
राजा बोला प्यास को भला कोई नही जीत सकता है क्या ?
साधू बोला है राजन इस कुटिया में चारो तरफ देखो कही तुम्हें पानी का मटका दिख रहा है नही दिखेगा क्युकी पानी मे पीता ही नही ये लोटा तो में सुबह से तुम्हारे लीये ही नदी से भरके लाया हूं
मेने एक हप्ते पहले तुमको अपने सिपाहियो के साथ क्रूरता से इस जंगल में हिरन का शिकार करते हुए देखा तब से मैने ठान था तुमको सबक सिखाकर ही रहूँगा
तुम क्या समझते हो अपने आप को अभी पानी पीया फिर पांच घंटे बाद फिरसे जरूरत पड़ेगी फिर पियोगे फिर खाना खाओगे फिर पांच घंटे बाद वहीं स्तिति तुम इस दुनिया मे क्या करने आये हो सिर्फ खाने पीने और हगने ?
राजा बोला महात्मा मुजे क्या करना चाहिए ?
साधु बोला तुम्हें ईश्वर का ध्यान धरना चाहिए जो मनुष्य साधू जीवन जीता है और ईश्वर की तप करता है वो सर्व शक्तिमान होता जाता है
मुजे देखलो मे हवा से श्वास लेता हूं,हवा से पानी पीता हूं,हवा से खाना भी खाता हूं,और हवा तो हर जगह है और कभी कभी श्वास भी लेना बंद कर देता हूं,कई वर्षों तक समाधि लीन होकर अपनी मौज में रहता हूं
ये सुनकर शूरवीर राजा बोला मुजे भी सिखाइये महात्मा में आपका दास बनने को तैयार हूं राजा और राजा अपना राजपाट छोड़कर सन्यासी हो गया..
दोस्तों फिर मिलेंगे एक और नई कहानी के साथ पढ़ने के लिए धन्यवाद🙏🙏

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