कौआ काला नही सफेद होता है
पुराने समय की बात है एक आदमी जिसका नाम था तुकाराम रास्ते पे अपने काम से कहीं जा रहा था तो रास्ते मे उसने कौआ देखा जो एक पेड़ पे बैठा काव काव कर रहा था
तुकाराम जैसे ही पेड़ के नीचे गुजरा कौए ने उसके ऊपर बीट कर दिया तुकाराम गुस्से से बोला तुजे और कोई जगह नही मिली तुजे मेरे पर ही हगना था कलमुए काले कौए
तभी एक आदमी वहाँ से गुजर रहा था आदमी बोला अरे भाई कौए को काला क्यों बोल रहे हो?
तुकाराम बोला भाई काले कौए को काला ही बोला जाता है न
आदमी बोला भाई कौए का रंग सफेद होता है इसलिए में बोल रहा हूं कि तुमने काला क्यों बोला?
तुकाराम बोला कौआ कभी सफेद रंग का होता है क्या?
आदमी बोला और नही तो क्या मेने तो आजतक कभी काला कौआ देखा ही नही है
तुकाराम गुस्से से बोला तू पागल है क्या जो काले कौऐ को सफेद बोल रहे हो
आदमी भी गुस्से से बोला मुजे तो तुम पागल लग रहे हो जो सफेद कौऐ को काला बोल रहे हो
तुकाराम का चहेरा गुस्से से तिलमिला उठा अबे पागल तूजे किसने कहा कौआ सफेद होता है?
वो आदमी भी गुस्से बोला साले पागल की औलाद तुजे किसने बोला कि कौआ काला होता है?
वो दोनों बीच रास्ते गाली गलौच पे उतर आए दोनों हाथापाई पर उतरे इससे पहले वहां से एक आदमी गुजरा ये दोनों उससे पूछने लगे कि कौआ काला होता है कि सफेद ?
वो आदमी बडा सायना निकला वो बोला इसमें पूछने वाली क्या बात है कौआ तो सफेद ही होता है
तुकाराम की शक्ल रोने जैसी हो गई तुकाराम बोला अरे भाई तुम भी नही जानते कौआ काला होता है?
तभी उस रास्ते पर और दो आदमी आ रहे थे ये तीनो लोगों ने मिलके उन दो आदमी ओ से पूछा
की कौआ काला होता है कि सफेद ?
वो दोनों आदमी एक दूसरे की और देखने लगे और बोले ये कोई पूछता है भला सबको पता है कौआ सफेद होता है
तुकाराम बोला सब सारे मिलकर मुजे पागल बना रहे हो चलो अपने राज्य के राजा दरबार मे चलते हैं जो राजा कहेंगे की कौआ सफेद है तो में मान लूंगा की कौआ सफेद होता है
सब मिलकर राजा के दरबार मे पहुचे तुकाराम ने हाथ जोड़कर राजा से फरियाद की की महाराज मेरा नाम तुकाराम है मुजे न्याय चाहिए यहाँ आपके दरबार मे न्याय मिलेगा ?
राजा बोला अवश्य मिलेगा बोलो तो सही समस्या क्या है ?
तुकाराम बोला ये सब लोग बोलते है कौआ सफेद रंग का होता है तो आप बताइए कौआ काला होता है कि सफेद?
राजा बोला इसमें पूछने वाली क्या बात है कौआ सफेद ही होता है तुकाराम ये सब ये सब सत्य बोल रहे है,,क्यों सही है ना दरबारियों,, दरबारी भी हा में हा मिलने लगे
राजा बोला जिसने जिसने बोला कौआ सफेद है जो सही है वो और वो अपने घर जा सकते है और तुकाराम ने सबको हेरान किया और इतनी सी छोटी सी बात के लिए राजदरबार का किमती समय बर्बाद किया इसके सजा के तौरपर तुकाराम को 10 चाबुक के कोड़े मारे जाए
सब मिलकर बोले सही है कौआ तो सफेद ही होता है और सब मिलकर तुकाराम पर हँसने लगे
तुकाराम की आँख में आंसू आ गए कि सब लोग इस गलत कैसे कर सकते है वो रोते हुए राजा से बोला मुझे क्यों सजा दे रहे है आप जो गुनेगार है उनको तो अपने तो जाने दिया ये अन्याय है ?
राजा बोला कोई अन्याय नही जो मेने किया वो सही है तुम सजा के ही पात्र हो
पर महाराज में सजा मुजे किस बात की सजा सच बोलने की?
राजा बोला नही नही सच बोलने की नही में तुम्हे उस आदमी से इतनी सी बात पर बहस करने की सजा दे रहा हूं सबको पता है कौआ काला होता है तो तुमने उससे बहस क्यों कि और अपना समय बर्बाद किया
और राजदरबार का भी क़ीमती समय बर्बाद किया ऐसे लोगो से बहस नही करनी चाहिये फिरसे याद रखो में तुम्हे गलत आदमी से वादविवाद करने की सजा दे रहा हूं..
शिक्षा;- ऐसे आदमी से बहेस ना करो जिसका काम धंधा ही बहेस करने का हो, मतलब जो बस जगड़ने की अलावा कोई काम ना करता हो जो बात बात पर जगड़ने के लिए तैयार हो.
पढ़ने के लिए धन्यवाद दोस्तो कहानी अच्छी लगे तो Shere करना फिर मिलेंगे एक और कहानी के साथ धन्यवाद🙏🙏🙏

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