एक हताश चित्रकार की कहानी
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| Chitrakar |
पुराने समय की बात है एक गांव में एक मशहूर चित्रकार था उसकी चित्रकारी का दुनिया मे कोई मुकाबला नही था लोगों की ऐसे हूबहू तसवीरे बनाता की जैसे लोग सचमे आईना देख रहे है
राजा महाराजाओ के चित्र बनाता राजाओ की बड़ी बड़ी तस्वीरे बनाता इसके बदले उसे सोनामोहर उपहार में मिलती उसे काम की कमी नहीं थी और नाम की भी कमी नही
राजा महाराजा उसके फ्री होने का इंतजार किया करते थे एक राजपरिवार का काम खत्म होता तो दूसरे राज घराने से बुलावा आता चित्रकार सबको समय दे देता
दिये गए समय पर राजाओ के रथ उसके घर के आंगन में आ जाते और चित्रकार अपना रंग और ब्रश का थैला लेके रथ पे सवार हो जाता ऐसे ही समय चलता गया
( पर दोस्तों समय कभी एक जैसा नही चलता कभी धूप तो कभी छाव कभी दिन तो कभी रात कभी दुःख तो कभी सुख ये तो आना ही है यही तो समय का नियम है )
एक दिन चित्रकार को लेने एक राज परिवार से एक रथ आया चित्रकार ने अपना थैला उठाया और रथ पे सवार हो गया
रथ धीरे धीरे चल रहा था चित्रकार बोला सारथी रथ को जरा तेज चलाइये राजमहल में पहोचने में देरी हो जाएगी सारथी रथ को तेज चलने लगा तो अचानक से रथ का पहिया के एक बड़े से पत्थर पे चढ़ गया और चित्रकार आगे को गिरा और रथ सहित उसका का पहिया उसके दाये हाथ के अंगूठे के ऊपर से गुजर गया
वो समझ पाता उससे पहले उसका अंगूठा हाथ से अलग हो चुका था चित्रकार को असहनीय दर्द हो रहा था उसे जल्दी वैध के पास ले जाया गया वैध ने मलहम पट्टी कर दी खून बहना रुक गया दर्द और पीड़ा भी कम हो गयी पर अंगूठा गया
अब चित्रकार घर मे हाथ पकड़ कर बैठ गया सब लोग रिस्तेदार हाल चाल पूछने आया करते और कहते
"है भगवान तुमपर तो दुःखो का पहाड़ तूट पड़ा"
अब क्या करोगे तुम तुम बिना अंगूठे के कैसे चित्र बनाओगे वो भी अँगूठा कटा भी दाये हाथ का, है भगवान ये क्या कर दिया इसका रोजी रोटी कमाने का जरिया छीन लिया
कुछ दिनों तक लोगों का आना जाना रहा
हुआ कुछ ऐसा की लोगों की बाते सुनते सुनते चित्रकार को नकारक्तम विचार आने लगे वो घरमे ही रहने लगा जैसे ही उसका दाये हाथ का अंगूठा कट गया उसने माना उसकी कलाकरी ही चली गई
दो महीने बीत गये घर मे जो चाहिए वो चाहिए ही अब वो अपना कमाया हुआ धन खर्च करने लगा धीरे धीरे समय बीतता गया पाँच छ महीनो में बचा खुचा पैसा भी पूरा होने लगा तो उसने यार दोस्तों से पैसा उधार लेने लगा फिर रिस्तेदारो से पैसे उधार लेने लगा
दोस्तो ओर रिस्तेदारो ने दो चार बार पैसे उधार दिये अबतो दोस्त और रिश्तेदार भी पक चुके थे पैसे उधार देदेके अब सब तंग हो चुके थे इसलिए जब भी चित्रकार को देखते तो अपना मुँह फिरा लेते थे
फिर चित्रकार ने अपना जमीन मकान सब गिरवी रख दिया उसके पैसों से घर चलाने लगा दो चार महीनों में सब पैसे पूरे हो गए
अब कर्जदार घर पर आने लगे अपने पैसों की मांग करने लगे धीरे धीरे चित्रकार का घर से निकलना मुश्किल होता जा रहा था कर्जदारों की घर और जमीन ख़ाली करने की धमकियां मिलनी शुरू हो गई
अब चित्रकार जिंदगी से बहुत हताश हो चुका था वो एक सुबह घर से निकल पड़ा सीधा जंगल की ओर चलता गया चलते चलते घने जंगल के बीच एक बड़ा सा बरगद का पेड़ था उसने उस बरगद की पेड़ की टहनियों से फांसी का फंदा बनाया और लटकने की तैयारी कर रहा था
तभी वहां से एक सज्जन व्यक्ति गुजरा उसने ये देखा और उस चित्रकार को फांसी चढ़ने से रोका और कहा कि भाई क्यो फाँसी लगा रहे हो?
चित्रकार बोला तुम अपने काम से काम रखो
वो व्यक्ति बोला ये फांसी लगाना गलत है आत्महत्या करना पाप है इस दुनिया मे कोई भी समस्या नहीं जिसका समाधान नही तो फिर तुम क्यों ये कायरता वाला काम कर रहे हो?
चित्रकार बोला मेरी समस्या का कोई समाधान नही तुम अपना काम करो मुझे अपना काम करने दो जाव यहाँ से
वो व्यक्ति बोला तुम बताओ तो सही तुम्हारी समस्या क्या है
चित्रकार गुस्से में बोला जबसे मेरा ये अँगूठा कटा तब से मेरी जिंदगी बद से बदतर हो गयी हैं
कभी में मशहूर चित्रकार हुआ करता था मेरा राजा महाराजा अपनी तस्वीर बनाने के लिए लाइन लगाए खड़े होते थे यार दोस्त की भी कमी नही थी समाज मे दुनिया मेरा नाम था लेकिन आज कोई भी मुझे देखते ही मुँह फेर लेता है
जब दुनिया को मुझसे मतलब था तब सब मेरे आगे पीछे हुआ करते थे लेकिन आज जब में विकलांग हो गया तो सभी ने मेरा साथ छोड़ दिया दुनिया बड़ी मतलबी है चित्रकार ने रोते हुए कहा अब तो मेरे बीवी बच्चे भी मुझसे नफरत करने लगे है
में क्या करूँ मुजे कुछ समझ मे नही आता अब तुम मुझे दिलासा दोगे पर उससे क्या होगा और इसके सिवा तुम भी क्या कर सकोगे क्या तुम मेरा ये कटा हुआ अंगूठा वापस उगा सकते हो
व्यक्ति बोला नही पर तुम मेरे साथ एक जगह चलो वहाँ तुम्हारी समस्या का समाधान है और तुम्हे समाधान नही मिला तो फांसी चढ़ने से में तुम्हे नही रोकूंगा बस एकबार मेरे साथ वहां चलो दो घन्टे की तो बात है
जैसे तैसे करके उस व्यक्ति ने चित्रकार को अपने साथ चलने के लिए मना ही लिया
वो व्यक्ति चित्रकार को एक कुंभार के पास ले गया जिसके दोनों हाथ नही थे किस वजह से कट गये थे फिरभी वो अपने पैरों से मटका बना रहा था और उसकी दुकान पे ग्राहकों की लाइन लगी थी कुंभार अपनी जिंदगी खुशी से व्यतीत कर रहा था
व्यक्ति ने चित्रकार को ये दिखाते हुए कहा इस कुंभार के दोनों हाथ नही है फिरभी ये कर्म कर रहा है और किसीका मोहताज नही है और तुम हो जो कायरता की हद पार कर चुके हो और आत्महत्या की सोच रहे हो
इसके भी बीवी बच्चे है घरपरिवार है ये तुम्हारी तरह कायर नही की सिर्फ एक उंगली कटने से आत्महत्या कर ले अंगूठा हुई तो उंगली ही न इसके दोनों हाथ कट गये ये खाने को भी लाचार है फिर भी कर्म करके अपनी जिंदगी स्वाभिमान से जी रहा है मुजे गर्व है इस आदमी पर
देखो चित्रकार तुम एक बात को समझ लो कि कलाकारी तुम्हारे अंगूठे में नही तुम्हरे दिमाग मे है तुम दूसरे हाथ से कोशिश करो एकबार चित्र खराब होगा दोबारा खराब होगा तीनबार होगा कभी न कभी तो सही तरह से चित्र बनेगा
ये दूसरा हाथ और उसका अँगूठा भी तुम्हारा ही है वो तो प्रेक्टिस ना होने की वजह से दाये हाथ जितना काम नही कर रहा धीरे धीरे वो भी काम करने लगेगा कोशिश तो करो
वो व्यक्ति बोला देखो मेरे पास तुम्हे देने के लिए कुछ भी नही मेने सुजाव दिया है अब तुम्हारी जो मर्जी जो करना है वो करो चाहो तो हिम्मत करके कर्म करो और चाहो तो कायरता से आत्महत्या करो तुम्हारी मर्जी में चला इतना कहकर वो व्यक्ति चला गया
चित्रकार सोचने लगा बात सही है मेरी तो सिर्फ एक उंगली कट गयी में इस हाथ से चित्र बनाने की कोशिश करूंगा,,उसने कोशिश की और वो एक हप्ते के भीतर ही मन चाहा चित्र बनाने लगा और वापस राजा महाराजा तसवीरें बनाने की कतार लगने लगी वो चित्रकार अपनी खुशहालजिंदगी खुशी से जीने लगा.
शिक्षा ;- दोस्तो चाहे कैसा भी समय आये हिम्मत मत हारो दुनिया मे कुछ लोग ऐसे होते है जो सबको demotivate करते है कोई राई जितने दुःख को पहाड़ बनाता है तो कोइ दुःखो के पहाड़ को राई का दाना बना देता है इसलिए दोस्तो जो लोग नकारात्मक सोचते है उनकी बातें दिमाग मे मत लो और सकारात्मक जिंदगी जियो,,🙏🙏
दोस्तों में मेरा नाम है विजय फिर मिलेंगे एक ओर नई मोटिवेशनल स्टोरी के साथ धन्यवाद🤗🙏🙏🙏

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